हर कोई आलूदगी का है शिकार
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
आज कल माहौल है नासाज़गार
हर तरफ है एक ज़ेहनी इंतेशार
है बडे शहरोँ मेँ जीना एक अज़ाब
हर कोई आलूदगी का है शिकार
आ रहे हैँ लोग शहरोँ की तरफ
गाँव का ना गुफ़तह बेह है हाले ज़ार
नित नए अमराज़ से है साबक़ा
पुर ख़तर है गर्दिशे लैलो नहार
आ रहा है जिस तरफ भी देखिए
एक तूफ़ाने हवादिस बार बार
बढ़ती जाती है गलोबल वार्मिंग
लोग हैँ जिस के असर से बेक़रार
है दिगर्गूँ आज मौसम का मिज़ाज
गर्दिशे हालात के हैँ सब शिकार
जिसको देखो बरसरे पैकार है
दामने इंसानियत है तार तार
है गलोबल वार्मिंग अहमद अली
एक मुसलसल कर्ब की आईना दार
मीडिया
डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ज़ाकिर नगर , नई देहली
मीडिया आज रखता है सब पर नज़र
काम है इसका निष्पक्ष देना ख़बर
ध्यान रखना ज़रूरी है इस बात का
इस के कवरेज का होता है गहरा असर
शक्तिशाली है आज इस क़दर मीडिया
मोड दे क़ौमी धारे को चाहे जिधर
है यह गणतंत्र का आज चौथा सुतूँ
रखता है सब को हालात से बाख़बर
आज है दाँव पर इस की निष्पक्षता
कर लेँ क़ब्ज़ा न इस पर कहीँ अहले ज़र
जिनका मक़्सद है सिर्फ अपना ही फ़यदा
चाहते हैँ बढाना वह अपना असर
कैसे अपनी बढाएँ वह टी आर पी
सिर्फ यह बात है उनके पेशे नज़र
कैसे आगे बढेँ गे बहुत जल्द वह
संसनीख़ेज़ ख़बरेँ न देँगे अगर
शायद उनको यह आभास हरगिज़ नहीँ
झूट की ज़िंदगी है बहुत मुख़्तसर
इस पे अंकुश ज़रूरी है अहमद अली
क्योँ कि है देश की स्मिता दाँव पर
फख़रे दौराँ ए पी जे अबदुल कलाम
डा. अहमद अली बरक़ी आज़मी
598।9, ज़ाकिर नगर नई देहली
फ़ख़रे दौराँ ए पी जे अबदुल कलाम
जिनका है साइंस मेँ आला मुक़ाम
काम से हैं अपने वह हर दिल अज़ीज़
जिस से है सारे जहाँ में उनका नाम
मरदे मीज़ाइल वह इस मुलक में
हिंद का है जिस से तुज़को एहतेशाम
मुलको मिललत की तरककी के लिए
जारीयो सारी है है उनका फ़ैज़े आम
वक़फ कर दी जिंदगी साइंस पर
इस लिए हैँ लायक़े सद एहतेराम
उलके ज़ररीँ कारनामोँ के सबब
ज़ेबे तारीख़े जहाँ है उनका नाम
उनका है तनहा यही क़ौमी मिशन
जुमला अबनाए वतन होँ नेकनाम
अशहबे दौराँ की उनके हाथ मेँ
इलमो फ़ज़लो आगही से है लगाम
कारगाहे ज़िंदगी मेँ अहले हिंद
होँ हमेशा सुरख़रू और नेक नाम
है नमूना उनकी अमली ज़िंदगी
लायक़े ताज़ीम है उनका मुक़ाम
ख़ाकसारी का है पैकर उनकी ज़ात
करता है अहमद अली उन को सलाम
आज है इंफ़ारमेशन टेकनालोजी की बहार
डा.अहमद अली बरक़ी आज़मी,598।9, ज़ाकिर नगर
नई देहली-110025
आज है इंफारमेशन टेकनालोजी की बहार
कोई गूगल पर फिदा है कोई याहू पर निसार
कोई उरदुसतानो विककीपीडिया का है असीर
है किसी को सिरफ बस चिठठाजगत का इंतेज़ार
है बलाग इसपाट का गिरवीदह कोई और कोई
कर रहा है दूसरी वेबसाइटोँ पर इंहेसार
इंडिया टाइमस हो जीमेल हो, या हाटमेल
चल रहा है आई टी से आज सब का कारोबार
आज है साइंस पर हर चीज़ का दारोमदार
अब नई क़दरँ पे है अहले जहाँ का ऐतेबार
फ़ासले सब कर दिए हैँ ख़तम अब ई मेल ने
लोग आख़िर कयोँ करेँ अब नामह बर का इंतेजार
ज़िंदगी का कोई भी शोबा नहीँ इस से अलग
आज कमपयूटर पे है सारे जहाँ का इंहेसार
हो फिज़ाई टेकनोलोजी या निज़ामे कायनात
करते हैँ मालूम इस से गरदिशे लैलो नेहार
जानते हैँ लोग इस से कया है मौसम का मिज़ाज
कयोँ फ़िज़ा मेँ उड रहे हैँ हर तरफ गरदो ग़ुबार
इसका है मरहूने मिननत आज सारा मीडिया
जितने सेटलाइट हैँ सब का है इसी पर इंहेसार
है सभी सेटलाइटोँ का इस से पैहम राबता
वरलड वाइड वेब से है यह हर किसी पर आशकार
आज के युग मेँ यह है सब के लिए बेहद मुफ़ीद
पडती है इस की ज़रूरत हर किसी को बार बार
आई टी को आप भी अपनाइए अहमद अलीआज है इस के लिए माहौल बेहद साज़गार
इंटरनेट
मुंहसिर है आज इंटरनेट पे दुनिया का निज़ाम
वकत के घोडे की है इसके ही हाथोँ मेँ लगाम
वरलड वाइड वेब मेँ सरवोततम है गूगल डाट काम
कर रहे हैँ आज सब उपयोग इसका ख़ासो आम
सब सवालोँ का तसलली बख़श देती है जवाब
इस लिए मशहूर है सारे जहाँ मेँ इसका नाम
हैँ रेडिफमेल और याहू भी नेहायत कारगर
और है चिठठाजगत का भी सभी पर फैज़े आम
है ज़ख़ीरा इलम का अनमोल विककीपीडिया
कर रहे हैँ फैज़ हासिल आज जिस से ख़ासो आम
हैँ वसीलह राबते का यह सभी वेबसाइटेँ
कर रही हैँ ख़िदमते ख़लक़े ख़ुदा जो सुबहो शाम
दूर और नज़दीक मेँ कुछ भी नहीँ है फ़ासला
चंद लमहोँ मेँ कहीँ भी भेज सकते हैँ पयाम
फारम भरना हो कोई या बुक कराना हो टिकट
आज इंटरनेट से है माक़ूल इसका इंतेज़ाम
रेडियो, अख़बार, टीवी, मीडिया अहले नज़र
इसतेफ़ादह कर रहे हैँ आज इस से ख़ासो आम
है मददगार आज यह साइंस की तहक़ीक़ मेँ
टेकनालोजी मेँ भी इस से ले रहे हैँ लोग काम
कारवाँ तहक़ीक़ का जब तक रहे गा गामज़न
काम आएगा मुसलसल इसका हुसने इंतेज़ाम
हैँ यह वेबसाइट ज़रूरत वक़त की अहमद अली
इस लिए अहले नज़र करते हैँ इनका एहतेमाम
पोलियो
पोलियो की है ज़रूरी रोक थाम
कीजिए बर वक़त इसका इंतेज़म
तंदुरुसती का है ज़ामिन यह डराप
इस लिए लाज़िम है इसका एहतेमाम
है यह बचचोँ के लिए जामे सेहत
तंदुरुसती की एलामत है यह जाम
है गर दरकार हिफ़ज़ाने सेहत
इस मिशन को कीजिए लोगोँ मेँ आम
क़ौम के मेमार हैँ बचचे यही
मुलक का जो कल सँभालेँ गे निज़ाम
है ज़रूरी इन की ज़ंहनी तरबियत
इन मेँ शायद हो कोई अबदुल कलाम
है नमूना जिस का किरदारो अमल
है ज़बाँ पर हर किसी की जिसका नाम
शायद इन मेँ कोई सर सययद भी हो
जिस का जारी आज तक है फैज़े आम
है अली गढ जिस काम मैदाने अमल
मुलक का रौशन किया है जिस ने नाम
कोई शायद हो हकीम अबदुल हमीद
जिस का है हमदरद एक नक़शे दवाम
था जो अपने आप मेँ एक अंजुमन
ख़िदमते ख़लक़े ख़ुदा था जिलका काम
जामिया हमदरद है इस का सबूत
इसतेफ़ादह कर रहे हैँ ख़ासो आम
हर कि ख़दमत करद ऊ मख़दूम शुद
ज़ात पर सादिक़ है उनकी यह कलाम
पोलियो दर असल है सोहाने रूह
इस का होगा कब न जाने एख़तेताम
हो सका इस का न अब तक सददेबाब
है यह बरक़ी एक इबरत का मोक़ाम
डा. अहमद अली बरक़ी आज़मी
598।9, ज़ाकिर नगर,नई देहली-110025