नज़रे अक़ीदत बहुज़ूरे मोहतरम सरवर आलम राज़ सरवर

नज़रे अक़ीदत बहुज़ूरे मोहतरम सरवर आलम राज़ सरवर
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
है मोरस्सा सरवर आलम राज़ सरवर का कलाम
करते हैँ अहले नज़र उनका नेहायत एहतेराम
कैफो सरमस्ती ,तग़ज्ज़ुल और हुस्ने फिक्रो फन
शायरी है उनकी गोया बादह ए इशरत का जाम
उनकी हर तस्नीफ है आईनाए नक़दो नज़र
अहदे नौ मेँ वक़्त की आवाज़ है उनका कलाम
उर्दू वेबसाइट है उनकी मर्जए अहले नज़र
इस्तेफ़ादह कर रहे हैँ जिस से यकसाँ ख़ासो आम
हैँ वह बेशक इफ़तेख़ारे सरज़मीने चाँद पूर
कर रहे हैँ जिस्का रोशन अब वह अमरीका मेँ नाम
उनकी अमली ज़िंदगी है मज़हरे हुस्ने अमल
उनके इल्मी कारनामे हैँ सभी नक़शे दवाम
उनकी तख़लीक़ात हँ उर्दू अदब का शाहकार
उनका अरबाबे नज़र मेँ है बहुत आला मोक़ाम
काम से हैँ अपने वह अहले नज़र मेँ सुर्ख़रू
है नहायत मोतबर उर्दू अदब मेँ उनका नाम
उनके गुलहाए मज़ामीँ से मुअत्तर है फ़ज़ा
इम्बेसातो कैफ से सरशार है उनका कलाम
मौजज़न हर शेर मेँ है सोज़ो साज़े ज़िंदगी
है सुरूदे सरमदी अहमद अली उनका कलाम

نذر عقید ت بحضور محترم سرور عالم راز سرور


मुशायरा/कवि-सम्मेलन “बरखा-बहार” भाग 2

महावीर
July 22, 2008
मुशायरा/कवि-सम्मेलन “बरखा-बहार” भाग 2
Filed under: प्राण शर्मा, महावीर शर्मा, सामान्य/General — महावीर @ 12:02 am
मुशायरा/कवि-सम्मेलन “बरखा-बहार” भाग 2

आदरणीय प्रधान जी, कवियों, कवियत्रियों और श्रोतागण को आपके सेवक (महावीर शर्मा) और श्री प्राण शर्माजी का नमस्कार।
‘बरखा-बहार’ पर १५ जुलाई २००८ के मुशायरे का अभी भी ख़ुमार बाक़ी है। आज जो गुणवान कवि और कवियत्रियां अपना अमूल्य समय देकर रचनाओं से इस कवि-सम्मेलन की शोभा बढ़ा रहे हैं, उन्हें मैं विनम्रतापूर्वक प्रणाम करता हूं। आप सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत है।
श्री महावीर जी का मैं बहुत आभारी हूं जिन्हों ने कवि सम्मेलन में शामिल कर, अहमद अली ‘बर्क़ी’ आज़मी, देवमणि पांडेय, द्विजेन्द्र ‘द्विज’, समीर लाल ‘समीर’, पारुल, रज़िया अकबर मिर्ज़ा, डॉ. मुंजु लता, नीरज गोस्वामी, राकेश खंडेलवाल, नीरज त्रिपाठी, रंजना भाटिया ‘रंजू’, सतपाल ‘ख़्याल’ जैसे गुणी कवियों और कवियत्रियों के साथ पढ़ने का सुनहरा मौक़ा दिया है।

यहां यह कहना उचित होगा कि यह कवि-सम्मेलन हमारे यू.के. के प्रितिष्ठित कवि, लेखक, समीक्षक और ग़ज़लकार श्री प्राण शर्मा जी की ही प्रेरणा और सुझाव से आयोजित किया किया गया है जिनका मार्गदर्शन पग-पग पर मिलता रहा है। आप ग़ज़ल की दुनिया में एक जाने माने उस्ताद हैं।


(वाह! वाह! के साथ तालियों से हॉल गूंज उठा है।)
***
आज हमें बेहद खुशी है कि हमारे दरमियान जनाब डॉ. अहमद अली बर्क़ी आज़मी साहेब मौजूद हैं। आपको शायरी का फ़न विरसे में मिला है। आप मशहूर शायर जनाब बर्क़ साहेब के बेटे हैं जो जनाब नूह नारवी के शागिर्द थे। जनाब नूह नारवी साहेब दाग़ देहलवी के शागिर्द थे।
डॉ. बर्क़ी साहेब ने फ़ारसी में पी.एच.डी. हासिल की है और आजकल ऑल इंडिया रेडियो में ऐक्स्टर्नल सर्विसिज़ डिवीज़न के पर्शियन (फ़ारसी) सर्विस में ट्रांस्लेटर/अनाउंसर/ब्रॉडकास्टर की हैसियत से काम कर रहे हैं। आप का तआरुफ़ आज की ग़ज़ल
में देखा जा सकता है।
मैं जनाब डॉ. अहमद अली ‘बर्क़ी’ साहेब से दरख़्वास्त करता हूं कि माइक पर आकर अपने कलाम से इस मुशायरे की शान बढ़ाएं :
जनाब अहमद अली ‘बर्क़ी’:

खिल उठा दिल मिसले ग़ुंचा आते ही बरखा बहार
ऐसे मेँ सब्र आज़मा है मुझको तेरा इंतेज़ार
आ गया है बारिशोँ मेँ भीग कर तुझ पर निखार
है नेहायत रूह परवर तेरी ज़ुल्फ़े मुश्कबार
जलवागाहे हुस्ने फितरत है यह दिलकश सबज़ाज़ार
सब से बढकर मेरी नज़रोँ मे है लेकिन हुस्ने यार
ज़िंदगी बे कैफ है मेरे लिए तेरे बग़ैर
गुलशने हस्ती मेँ मेरे तेरे दम से है बहार
है जुदाई का तसव्वुर ऐसे मेँ सोहाने रूह
आ भी जा जाने ग़ज़ल मौसम है बेहद साज़गार
ग़ुचा वो गुल हंस रहे हैँ रो रहा है दिल मेरा
इमतेहाँ लेती है मेरा गर्दिशे लैलो नहार
साज़े फ़ितरत पर ग़ज़लख़्वाँ है बहारे जाँफेज़ा
क़ैफ़—ओ— सरमस्ती से हैँ सरशार बर्क़ी बर्गो बार
(श्रोतागण खड़े होकर तालियों से ‘बर्क़ी’ साहेब के धन्यवाद और दाद का इज़हार कर रहे हैं।)
जनाब डॉ. बर्क़ी साहेब आपकी शिरकत के लिए हम सभी तहे दिल से ममनून और शुक्रगुज़ार हैं। उम्मीद है कि आगे होने वाले मुशायरों में भी आपकी राहनुमाई मिलती रहेगी।
***
“छ्म छम छम दहलीज़ पे आई मौसम की पहली बारिश
गूंज उठी जैसे शहनाई मौसम की पहली बारिश”

ABOUT ME- DR> AHMAD ALI BARQI AZMI


M.A.(Urdu,Persian),B.Ed
PH.D.(Persian)On "Socio-Political Trends in Persian Poetry Of The Constitutional Period of Iran(1906-1925)"Under The Guidance of Prof.A.W.Azhar Dehlavi of JNU,New Delhi
Composing Topical Urdu Poetry On Current National And International Events and International Days keeping in view the needs of the hour aims at creating awareness among the masses about recent strides in Science and Information Technology and danger of the increasing pollution &Global Warming to the mankind.

ABOUT ME: Dr.AHMAD ALI BARQI AZMI

M.A.(Urdu,Persian),B.Ed
PH.D.(Persian)On "Socio-Political Trends in Persian Poetry Of The Constitutional Period of Iran(1906-1925)"Under The Guidance of Prof.A.W.Azhar Dehlavi of JNU,New Delhi
Composing Topical Urdu Poetry On Current National And International Events and International Days keeping in view the needs of the hour aims at creating awareness among the masses about recent strides in Science and Information Technology and danger of the increasing pollution &Global Warming to the mankind.

GHAZAL

ग़ज़ल
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी

ख़िल उठा दिल मिसले ग़ुंचा आते ही बरखा बहार
ऐसे मेँ सब्र आज़मा है मुझको तेरा इंतेज़ार
आ गया है बारिशोँ मेँ भीग कर तुझ पर निखार
है नेहायत रूह परवर तेरी ज़ुल्फ़े मुश्कबार
जलवागाहे हुस्ने फितरत है यह दिलकश सबज़ाज़ार
सब से बढकर मेरी नज़रोँ मे है लेकिन हुस्ने यार
ज़िंदगी बे कैफ है मेरे लिए तेरे बग़ैर
गुलशने हस्ती मेँ मेरे तेरे दम से है बहार
है जुदाई का तसव्वुर ऐसे मेँ सोहाने रूह
आ भी जा जाने ग़ज़ल मौसम है बेहद साज़गार
ग़ुचा वो गुल हंस रहे हैँ रो रहा है दिल मेरा
इमतेहाँ लेती है मेरा गर्दिशे लैलो नहार
साज़े फ़ितरत पर ग़ज़लखवाँ है बहारे जाँफेज़ा
कैफो सरमस्ती से हैँ सरशार बर्क़ी बर्गो बार

GHAZAL BY DR.AHMAD ALI BARQI AZMI

मेरा तआरुफ

मेरा तआरुफ
शहरे आज़मगढ है बर्क़ी मेरा आबाई वतन
जिसकी अज़मत के निशाँ हैँ हर तरफ जलवा फेगन
मेरे वालिद थे वहाँ पर मर्जए अहले नज़र
जिनके फिकरो फ़न का मजमूआ है तनवीरे सुख़न
नाम था रहमत इलाही और तख़ल्लुस बर्क़ था
ज़ौफ़ेगन थी जिनके दम से महफ़िले शेरो सुख़न
आज मैँ जो कुछ हूँ वह है उनका फ़ैज़ाने नज़र
उन से विरसे मेँ मिला मुझको शऊरे फिकरो फ़न
राजधानी देहली मेँ हूँ एक अर्से से मुक़ीम
कर रहा हूँ मैँ यहाँ पर ख़िदमते अहले वतन
रेडियो के फ़ारसी एकाँश से हूँ मुंसलिक
मेरा असरी आगही बर्क़ी है मौज़ूए सुख़न

डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ज़ाकिर नगर, नई दिल्ली

आज इंटर्नेट पे है हर चीज़ का दारो मदार

आज इंटर्नेट पे है हर चीज़ का दारो मदार
डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मी

खोले हैँ इंफ़ार्मेशन टेक्नोलोजी ने ये द्वार
आज इंटर्नेट पे है हर चीज़ का दारो मदार
हो गए हैँ बुद्धिजीवी और लेखक हाईटेक
व्यक्त करते हैँ ब्लागस्पाट पर अपने विचार
लिख रहा है लेख अपने ब्लागवाणी पर कोई
है किसी को सिर्फ बस चिट्ठाजगत पर एतबार
लेखकोँ मे बढ रहा है अब ब्लागिंग का चलन
पाठकोँ को रहता है हर वक्त इसका इंतेज़ार
आधुनिक युग मेँ यह है प्रचार का साधन नया
विश्व मेँ है अब ब्लागिंग एक उत्तम कारोबार
हो प्रदूषण की समस्या या ग्लोबल वार्मिंग
सामयिक विषयोँ पे मैँ भी व्यक्त करता हूँ विचार
है सशक्त अभिव्यक्ति का यह माध्यम अहमद अली
इस लिए मैँने किया है आज इसको अख़्तेयार

मीडिया

मीडियाa
डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ज़ाकिर नगर , नई देहली

मीडिया आज रखता है सब पर नज़र
काम है इसका निष्पक्ष देना ख़बर
ध्यान रखना ज़रूरी है इस बात का
इस के कवरेज का होता है गहरा असर
शक्तिशाली है आज इस क़दर मीडिया
मोड दे क़ौमी धारे को चाहे जिधर
है यह गणतंत्र का आज चौथा सुतूँ
रखता है सब को हालात से बाख़बर
आज है दाँव पर इस की निष्पक्षता
कर लेँ क़ब्ज़ा न इस पर कहीँ अहले ज़र
जिनका मक़्सद है सिर्फ अपना ही फ़यदा
चाहते हैँ बढाना वह अपना असर
कैसे अपनी बढाएँ वह टी आर पी
सिर्फ यह बात है उनके पेशे नज़र
कैसे आगे बढेँ गे बहुत जल्द वह
संसनीख़ेज़ ख़बरेँ न देँगे अगर
शायद उनको यह आभास हरगिज़ नहीँ
झूट की ज़िंदगी है बहुत मुख़्तसर
इस पे अंकुश ज़रूरी है अहमद अली
क्योँ कि है देश की स्मिता दाँव पर

Ghazal

Ghazal
Dr.Ahmad Ali Barqi Azmi

Sata lein hamko dilchaspi jo hai unko satane mein
Hamara kya woh ho jayeinge ruswa khud zamane mein
Ladayegi meri tadbir ab taqdeer se panja
Natija chahe jo kuchh ho muqaddar aazmane mein
Jise bhi dekhiye hai gardish e haalaat se naalaan
Sukoon e dil nahin hasil kisi ko bhi zamane mein
Who gulchin ho ki bijli sab ki aankhon mein khatakte hain
Yahi do char tinke jo hain mere aashiyane mein
Hai kuchh logon ki khaslat nau e insaan ki dilaazaari
Maza milta hai unko doosron ka dil dukhane mein
Ajab dastoor e duniya e mohabbat hai are tauba
Koi roone mein hai mashghool koie muskurane mein
Patingon ko jala Shma e mahfil sab koo aye BARQI
Dikhane ke liye masroof hai aansoo bahane mein

GHAZAL

GHAZAL
DR.AHMAD ALI BARQI AZMI
598/9, Zakir Nagar, Jamia Nagar
New Delhi-11025

Dard E Dil Apni Jagah Dard E Jigar Apni Jagah
Ashkbaari Kar Rahi Hai Chashm E Tar Apni Jagah
Sakit O samit Hain Donon Meri Haalat Dekh Kar
Aaina Apni Jagah Aainagar Apni Jagah
Baagh Mein Kaise Guzarein Pur Musarrat Zindagi
Baaghbaan Ka Khauf Aur Gulchin Ka Dar Apni Jagah
Meri Kashti Ki Rawaani Dekh kar Toofaan Mein
Pad Gayee Hai Sakht Chakkar Mein Bhanwar Apni jagah
Hai Ayaan Ashaar Se Mere Mera Soz E Duroon
Meri Aah E Aatashin Hai Be Asar Apni Jagah
Haal E Dil Kisko Sunayein Koi Sunta Hi Nahin
Apni Dhun Mein Hai Magan Woh Charahgar Apni Jagah
Ashkbaari Kaam Aayee Kuchh Na BARQI Hijr Mein
Sau Sifar Jode Nateeja Tha Sifar Apni Jagah