पर्यावरण प्रदूषण
है कहीँ बर्ड फ़्लू और कहीँ एड्स का डर
देखिए जिसको वह आता है परेशान नज़र
सभी मसरूफ है करने मेँ तजरबात नऐ
जिनका माहौल पे अब साफ नुमायाँ है असर
ऐसे अमराज़ है दरपेश नहीँ जिनका इलाज
इब्ने आदम ने जो बोया है यह है उसका समर
आब मसमूम है आलूदह फ़िजा किस से कहेँ
अहले भोपाल पे क्या गुज़री उन्हीँ को है ख़बर
हर तरफ लोग हैँ तूफ़ाने हवादिस के शिकार
साफ पानी नहीँ लोगोँ को मोयस्सर अकसर
मुर्ग़ो माही हैँ गिरिफ़्तारे अज़ीयत इस से
कारख़ानोँ की कसाफत से है जीना दो भर
उम्मुल अमराज़ है दर अस्ल यही आबो हवा
जिसमेँ रहने को हैँ मजबूर सभी शामो सहर
ताज़गी सहने गुलिस्ताँ से हुई यूँ ग़ायब
हैँ ख़ेज़ाँ दीदह सभी सर्वो समन बर्गो शजर
है यह ताक़त का नशा जिसकी बदौलत कुछ लोग
कर रहे हैँ ग़मो आलाम से भी सर्फ़े नज़र
माहो मिर्रीख़ की तसख़ीर का है उनको ख़याल
इब्ने आदम के मसायब की नहीँ उनको ख़बर
उनको मलहूज़ है हर हाल मेँ अपना ही मफ़ाद
इस लिए करते हैँ पैमाने कयोटो से मफ़र
इस मुसीबत से नहीँ अहमद अली जाए फ़रार
भाग कर जाए तो अब जाए कहाँ नौए बशर
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ज़ाकिर नगर, नई दिल्ली-110025
आधुनिक शिक्षा और हम
काल सेंटर का जिधर भी देखिए फैला है जाल
है यह सब इंफार्मेशन टेकनोलोजी का कमाल
आज कमप्यूटर पे है अहले जहँ का इंहेसार
कर रहे हैँ इस्तेफ़दा लोग इस से हस्बेहाल
सब हैँ मायल साफ़्टवेयर टेकनोलोजी की तरफ
आई टी मेँ आज है बंगलोर को हासिल कमाल
हम फ़ज़ाई टेकनोलोजी मेँ किसी से कम नहीँ
आज सेटलाइट से मुम्किन है जो था पहले मोहाल
सिलसिले इंसैट के हैँ इस हक़ीक़त के गवाह
आसमाँ पर हम बिछा सकते हैँ सेटलाइट का जाल
हिंद सदियोँ से रहा है मर्कज़े इल्मो हुनर
यह हक़ीक़त है नहीँ इसमेँ ज़रा भी एहतेमाल
होमी भाभा एस धवन और ए पी जे अब्दुल कलाम
मादरे हिंदोस्ताँ के हैँ जलीलुलक़द्र लाल
दर हक़ीक़त आलमी शोहरत के हामिल हैँ यह लोग
हैँ अज़ीमूश्शान इनके कारनामे बेमिसाल
असरे हाज़िर मेँ नई क़दरोँ को हासिल है फ़रोग़
हो रहा है दिन बदिन अक़दारे कोहना का ज़वाल
आज कल ई मेल का है बोलबाला हर तरफ़
जिस से है शर्मिंदए ताबीर हर ख़्वाबो ख़याल
है उन्हीँ को आज हर शोबे मेँ हासिल इम्तेयाज़
करते हैँ आइंदा नस्लोँ की जो बेहतर देख भाल
एक़तेज़ाए वक़्त है साइंस हो जुज़वे निसाब
सुरखुरू होँ ता कि पढ़ लिख कर हमारे नौनेहाल
ज़िंददी की दौड मेँ हम भी न क्योँ आगे बढेँ
लोग सरगर्मे अमल हैँ हम हैँ क्योँ आख़िर निढाल
वक़्त की है यह ज़रूरत आजकल अहमद अली
उसका मुस्तक़बिल है रोशन जिस मेँ है फ़ज़लो कमाल
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ज़ाकिर नगर, नई दिल्ली-110025