Monday, January 25, 2010

Hind MeiN Jamhooriyat ke saath Saal


Hind MeiN Jamhooriyat ke saath Saal
Ahmad Ali Barqi Azmi

Hind meiN jamhooriyat ke saath saal
Ahd e nau meiN aaj haiN ek nek phaal

Hai DarakhshaaN is ka maazi aur haal
Is ki azmat ke nishaaN hain la zawaal

Hai jahaaN bhi aaj jamhoori nizaam
Dete haiN ahl e nazar is ki misaal

In guzashtah saath saaloN meiN yahaaN
Fikr o fun ka baar aawar hai nehaal

Hai yeh aqsaa e jahaaN meiN sar buland
KyoN na haasil ho ise auj e kamaal

IT meiN yeh sar e fihrist hai
Jo hai fikr o fun ka dilkash ittesaal

Dekh kar ahl e nazar haiN dam bakhud
Is ki tahzeebi rawaayat ka jalaal

Is ke haiN fitri manazir dilfareb
Hai yeh ek mashshatah e husn o Jamaal

Hai dua meri basad ijz o neyaaz
HooN na yeh jamhoori qadreiN paimaal

Amn e aalam ka ho yeh Barqi naqeeb
Is ko haasil ho urooj e la zawaal

Thursday, January 21, 2010

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Tuesday, December 15, 2009

जन्म दिन पर शुभ कामनाऐँ

Dear Dr Basant Jeevan Banerjee
Namaskaar
De Raha HooN janm din ki aap ko Shubh Kammna
Gulshan e ummid yunhi aap ka phoole phale

Aao jo chaheiN muyassar ho Khuda ke fazl se
Aap ke gulzaar e Hasti meiN hamesha gul khile
Shubh Chintak
दे रहा हूँ जन्म दिन की आप को शुभ कामना
गुलशन-ए- उम्मीद यूँ ही आपका फूले फले

आप जो चाहेँ मुयस्सर हौ ख़ुदा के फ़ज़्ल से
आपके गुलज़ार-ए-हस्ती मेँ हमेशा गुल खिले
शुभ चिंतक
डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मी

Dr.Ahmad Ali Barqi Azmi
http://aabarqi.blogspot.com
http://aabarqi.webs.com
http://www.drbarqizami.com

Saturday, October 17, 2009

भर दे दिल मेँ यह दिवाली आपके ख़ुशियोँ के रंग : डा. अहमद अली बर्की आज़मी


भर दे दिल मेँ यह दिवाली आपके ख़ुशियोँ के रंग : डा. अहमद अली बर्की आज़मी

भर दे दिल मेँ यह दिवाली आपके ख़ुशियोँ के रंग
आपके इस रंग मेँ पडने न पाए कोई भंग


जो जहाँ हो उसको हासिल हो वहाँ ज़ेहनी सुकून
दूर हो जाए जहाँ से बुगज़, नफरत और जंग


अपने दिल को साफ रखिए आप मिसले आइन
आपकी शमशीरे ईमाँ पर न लगने पाए ज़ंग


है ज़रूररत वक्त की आपस में रखिए मेल जोल
भाइचारा देख कर सब आपका रह जाएँ दंग


आइए आपस मेँ मिल कर यह प्रतिज्ञा हम कर
रंग मे अपनी दिवाली के न पडने देँगे भंग


महफ़िले शेरो सुख़न मेँ जश्न का माहौल है
कीजिए नग़मा सराई आप बर्क़ी लेके चंग

Saturday, September 19, 2009

Ghazal Of Dr.Ahmad Ali Barqi Azmi In Roznamah Rashtriya Sahara



آئی ھے آج لے کے خوشی کا پیام عید Eid Mubarak



Monday, August 24, 2009

डा.अहमद अली बर्क़ी आज़मी की प्रदूषण पर कविताय़ेँ



डॉ. अहमद अली बर्क़ी आज़मी का परिचय
शहरे आज़मगढ़ है बर्क़ी मेरा आबाई वतन
जिसकी अज़मत के निशां हैं हर तरफ जलवा-फ़ेगन
मेरे वालिद थे वहां पर मरक़ज़-ए अहले- नज़र
जिनके फ़िक्रो-फ़न का मजमूआ है `तनवीरे- सुख़न'
नाम था रहमत इलाही और तख़ल्लुस `बर्क़' था
ज़ौफ़ेगन थी जिनके दम से महफ़िले शेरो-सुख़न
आज मैं जो कुछ हूँ वह है उनका फ़ैज़ाने नज़र
उन विरसे में मिला मुझको शऊरे-फ़िक्र-ओ-फ़न
राजधानी देहली में हूँ एक अर्से से मुक़ीम
कर रहा हूँ मैं यहां पर ख़िदमते अहले वतन
रेडियो के फ़ारसी एकाँश से हूँ मुंसलिक
मेरा असरी आगही बर्क़ी है मौज़ूए सुख़न .
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी, ज़ाकिर नगर, नई दिल्ली


आज ग्रसित है प्रदूषण से हमारा वर्तमान
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी

है प्रदूषण की समस्या राष्ट्रव्यापी सावधान
कीजिए मिल जुल के जितनी जल्द हो इसका निदान

है गलोबलवार्मिंग अभिषाप अन्तर्राष्ट्रीय
इससे छुटकारे की कोशिश कार्य है सबसे महान

हो गई है अब कयोटो सन्धि बिल्कुल निष्क्रिय
ग्रीनहाउस गैस है चारोँ तरफ अब विद्यमान

आज विकसित देश क्यूँ करते नहीँ इस पर विचार
विश्व मेँ हर व्यक्ति को जीने का अवसर है समान

हर तरफ प्राकृति का प्रकोप है चिंताजनक
ले रही है वह हमारा हर क़दम पर इम्तेहान

पूरी मानवता तबाही के दहाने पर है आज
इस से व्याकुल हैँ निरन्तर बच्चे बूढे और जवान

ग्रामवासी आ रहे हैँ अब महानगरोँ की ओर
है प्रदूषण की समस्या हर जगह बर्क़ी समान
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
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है प्रदूषण की ज़रूरी रोक थाम
डॉ. अहमद अली बर्क़ी आज़मी

है प्रदूषण की ज़रूरी रोक थाम
सब का जीना कर दिया जिसने हराम
आधुनिक युग का यह एक अभिशाप है
जिस पे आवश्यक लगाना है लगाम
है कयोटो सन्धि बिल्कुल निष्क्रिय
है ज़रूरी जिसका करना एहतेराम
अब बडे शहरोँ मेँ जीना है कठिन
ज़हर का हम पी रहे हैँ एक जाम
है प्रदूषित हर जगह वातावरण
काम हो जए न हम सब का तमाम
बढ़ रहा है दिन बदिन ओज़ोन होल
है ज़ुबाँ पर हर किसी की जिसका नाम
है गलोबल वार्मिंग का सब को भय
लेती है प्राकृकि से जो इंतेक़ाम
आज मायंमार है इसका शिकार
कल न जाने हो कहाँ यह बेलगाम
इसका जारी हर जगह प्रकोप है
हो नगर 'अहमद अली' या हो ग्राम
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी