Wednesday, December 31, 2008

नया साल ख़ुशियोँ का पैग़ाम लाए نیا سال خوشیوں کا پیغام لائے




नया साल ख़ुशियोँ का पैग़ाम लाए
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी

नया साल ख़ुशियोँ का पैग़ाम लाए
ख़ुशी वह जो आए तो आकर न जाए

ख़ुशी यह हर एक व्यक्ति को रास आए
मोहबब्बत के नग़मे सभी को ससुनाए

रहे जज़बए ख़ैर ख़्वाही सलामत
रहैँ साथ मिल जुल के अपने पराए

जो हैँ इन दिनोँ दूर अपने वतन से
न उनको कभी यादे ग़ुर्बत सताए

नहीँ ख़िदमते ख़ल्क़ से कुछ भी बेहतर
जहाँ जो भी है फ़र्ज़ अपना निभाए

मुहबबत की शमएँ फ़रोज़ाँ होँ हर सू
दिया अमन और सुल्ह का जगमगाए

रहेँ लोग मिल जुल के आपस मँ बर्क़ी
सभी के दिलोँ से कुदूरत मिटाए

4 comments:

विनय said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति, नववर्ष की शुभकामनाएँ

नीरज गोस्वामी said...

नया साल आप के लिए भी खुशियों के पैगाम लाये...आमीन...
नीरज

शुभम आर्य said...

नया साल आए बन के उजाला
खुल जाए आपकी किस्मत का ताला|
चाँद तारे भी आप पर ही रौशनी डाले
हमेशा आप पे रहे मेहरबान उपरवाला ||

नूतन वर्ष मंगलमय हो |

"अर्श" said...

पहले तो आप और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.
बहोत ही खुबसूरत कविता के साथ इस साल को बिदा कर रहे है आप और साथ में नव वर्ष की स्वागत भी .

ढेरो बधाई आपको...
अर्श