Thursday, January 8, 2009

Poetic Compliment To Janab Abdul Rehman



मिर्ज़ा ग़ालिब की भूमिका मे श्री अब्दुल रहमान की तस्वीर देख कर
डा. अहमद अली बर्क़ी आजमी


मोहतरम रहमान फ़खक़रे रोज़गार
हैँ यह तस्वीरेँ नेहायत शानदार

है नुमायाँ आपका ज़ौके सलीम
फ़न्ने अक्कासी का हैँ यह शाहकार

मिर्ज़ा ग़ालिब होते गर इस दौर मेँ
करते गुलहाए मोहब्बत वह निसार

जितनी भी तारीफ की जाए है कम
आपका किरदार है बाग़ो बहार

देख कर मैँ होगया हैरत ज़दह
चाहता है दिल यह देखूँ बार बार

कब मोकमम्ल होगी ग़ालिब पर यह फ़िल्म
मुझको है उस वक़्त का अब इंतेज़ार

है दुआ अहमद अली बर्क़ी मेरी
फ़िल्म हो यह एक दुर्रे शाहवार

No comments: