Thursday, July 3, 2008

जिस तरफ देखो प्रदूषण का उधर फैला है जाल

जिस तरफ देखो प्रदूषण का उधर फैला है जाल
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
वास्तव मेँ है ग्लोबल वीर्मिंग का यह कमाल
अहले अमरीका जिसने कर दिया जीना मुहाल
है कहीँ कटरीना और रीटा कहीँ ज़ेरे सवाल
है यह फितरत का इशारा हर कमाले रा ज़वाल
अब भी कुछ बिगडा नही है होँ अगर सब हमख़्याल
मिल के कर सकते हैँ मोन्टर्याल कन्वेंशन बहाल
सब परीशाँहाल हैँ हो जल्द इसका ख़ातमा
जिस तरफ देखो प्रदूषण का उधर फैला है जाल
हो रहे हैँ लोग अमराज़े तनफ़्फुस के शिकार
पुर मुसर्रत ज़िंदगी है आजकल ख़्वाबो श़याल
मसलहत अंदेश हैँ अहले सियासत आज कल
कोई करता ही नहीँ नौए बशर की देख भाल
कह रहा है यह ज़बाने हाल से भोपाल आज
हम पे जो गुज़री है हम ही जानते हैँ उसका हाल
आज कल हालात से लेता नहीँ कोई सबक़
जिस से ख़तरे मेँ है हर दम हर किसी की जानोमाल
वक़्त का है यह तक़ाजा़ हो कयोटो पर अमल
होँ सभी इसके लिए बर्की हमेशा हम ख़्याल

फितरत- प्रकृति, हर कमाले रा ज़वाल-हर उत्थान का पतन, अमराज़े तनफ़्फुस- दमा, नौए बशर- इंसान

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