Thursday, July 24, 2008

नज़रे अक़ीदत बहुज़ूरे मोहतरम सरवर आलम राज़ सरवर

नज़रे अक़ीदत बहुज़ूरे मोहतरम सरवर आलम राज़ सरवर
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
है मोरस्सा सरवर आलम राज़ सरवर का कलाम
करते हैँ अहले नज़र उनका नेहायत एहतेराम
कैफो सरमस्ती ,तग़ज्ज़ुल और हुस्ने फिक्रो फन
शायरी है उनकी गोया बादह ए इशरत का जाम
उनकी हर तस्नीफ है आईनाए नक़दो नज़र
अहदे नौ मेँ वक़्त की आवाज़ है उनका कलाम
उर्दू वेबसाइट है उनकी मर्जए अहले नज़र
इस्तेफ़ादह कर रहे हैँ जिस से यकसाँ ख़ासो आम
हैँ वह बेशक इफ़तेख़ारे सरज़मीने चाँद पूर
कर रहे हैँ जिस्का रोशन अब वह अमरीका मेँ नाम
उनकी अमली ज़िंदगी है मज़हरे हुस्ने अमल
उनके इल्मी कारनामे हैँ सभी नक़शे दवाम
उनकी तख़लीक़ात हँ उर्दू अदब का शाहकार
उनका अरबाबे नज़र मेँ है बहुत आला मोक़ाम
काम से हैँ अपने वह अहले नज़र मेँ सुर्ख़रू
है नहायत मोतबर उर्दू अदब मेँ उनका नाम
उनके गुलहाए मज़ामीँ से मुअत्तर है फ़ज़ा
इम्बेसातो कैफ से सरशार है उनका कलाम
मौजज़न हर शेर मेँ है सोज़ो साज़े ज़िंदगी
है सुरूदे सरमदी अहमद अली उनका कलाम

1 comment:

Udan Tashtari said...

वाह आज़मी साहेब, आपने तो हमारी बात का इतनी जल्दी मान रख कर हमें अपना मुरीद बना लिया.सरवर साहेब को पढ़ना एक अनुभव रहा. आपका बहुत शुक्रिया.