Tuesday, May 13, 2008

आलूदगी मिटाएँ

आलूदगी मिटाएँ
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ज़ाकिर नगर, नई दिल्ली-110025
मिल जुल के आइए हम ऐसी फ़ज़ा बनाएँ
आलूदगी की जुमला अक़साम को मिटाएँ
असरे जदीद की यह सब से बडी है लानत
नौए बशर को इस से हर हाल मेँ बचाएँ
है कार्बन बकसरत, महदूद आक्सीज़न
क्लोरीन के असर से मसमूम हैँ फ़ज़ाएँ
सब से बडी जहाँ मेँ नेमत है तंदुरुस्ती
हर शख़्स को तवज्जोह इस बात पर दिलाएँ
है बाइसे सआदत ख़ल्क़े ख़ुदा की ख़िदमत
अब आइए बख़ूबी इस फ़र्ज़ को निभाएँ
हो बरक़रार जिस से माहौल मेँ तवाज़ुन
हुस्ने अमल से अपने वह काम कर दिखाएँ
मद्दे नज़र हो अपने हर हाल मेँ तवाज़ुन
ताज़ा हवा मेँ धूमेँ ख़ालिस ग़ेज़ाएँ खाएँ
हर चीज़ अलग़रज़ है आलूदगी की ज़द मेँ
है फ़र्ज़े ऐन अपना इस से नजात पाएँ
एक बेहिसी सी तारी अहमद अली है सब पर
रूदादे असरे हाज़िर आख़िर किसे सुनाएँ

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