Friday, May 2, 2008

इंटरनेट Topical Poetry On The Relevance Of Internet & IT for Mankind

इंटरनेट

मुंहसिर है आज इंटरनेट पे दुनिया का निज़ाम
वकत के घोडे की है इसके ही हाथोँ मेँ लगाम
वरलड वाइड वेब मेँ सरवोततम है गूगल डाट काम
कर रहे हैँ आज सब उपयोग इसका ख़ासो आम
सब सवालोँ का तसलली बख़श देती है जवाब
इस लिए मशहूर है सारे जहाँ मेँ इसका नाम
हैँ रेडिफमेल और याहू भी नेहायत कारगर
और है चिठठाजगत का भी सभी पर फैज़े आम
है ज़ख़ीरा इलम का अनमोल विककीपीडिया
कर रहे हैँ फैज़ हासिल आज जिस से ख़ासो आम
हैँ वसीलह राबते का यह सभी वेबसाइटेँ
कर रही हैँ ख़िदमते ख़लक़े ख़ुदा जो सुबहो शाम
दूर और नज़दीक मेँ कुछ भी नहीँ है फ़ासला
चंद लमहोँ मेँ कहीँ भी भेज सकते हैँ पयाम
फारम भरना हो कोई या बुक कराना हो टिकट
आज इंटरनेट से है माक़ूल इसका इंतेज़ाम
रेडियो, अख़बार, टीवी, मीडिया अहले नज़र
इसतेफ़ादह कर रहे हैँ आज इस से ख़ासो आम
है मददगार आज यह साइंस की तहक़ीक़ मेँ
टेकनालोजी मेँ भी इस से ले रहे हैँ लोग काम
कारवाँ तहक़ीक़ का जब तक रहे गा गामज़न
काम आएगा मुसलसल इसका हुसने इंतेज़ाम
हैँ यह वेबसाइट ज़रूरत वक़त की अहमद अली
इस लिए अहले नज़र करते हैँ इनका एहतेमाम

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