Tuesday, May 13, 2008

पर्यावरण प्रदूषण
है कहीँ बर्ड फ़्लू और कहीँ एड्स का डर
देखिए जिसको वह आता है परेशान नज़र
सभी मसरूफ है करने मेँ तजरबात नऐ
जिनका माहौल पे अब साफ नुमायाँ है असर
ऐसे अमराज़ है दरपेश नहीँ जिनका इलाज
इब्ने आदम ने जो बोया है यह है उसका समर
आब मसमूम है आलूदह फ़िजा किस से कहेँ
अहले भोपाल पे क्या गुज़री उन्हीँ को है ख़बर
हर तरफ लोग हैँ तूफ़ाने हवादिस के शिकार
साफ पानी नहीँ लोगोँ को मोयस्सर अकसर
मुर्ग़ो माही हैँ गिरिफ़्तारे अज़ीयत इस से
कारख़ानोँ की कसाफत से है जीना दो भर
उम्मुल अमराज़ है दर अस्ल यही आबो हवा
जिसमेँ रहने को हैँ मजबूर सभी शामो सहर
ताज़गी सहने गुलिस्ताँ से हुई यूँ ग़ायब
हैँ ख़ेज़ाँ दीदह सभी सर्वो समन बर्गो शजर
है यह ताक़त का नशा जिसकी बदौलत कुछ लोग
कर रहे हैँ ग़मो आलाम से भी सर्फ़े नज़र
माहो मिर्रीख़ की तसख़ीर का है उनको ख़याल
इब्ने आदम के मसायब की नहीँ उनको ख़बर
उनको मलहूज़ है हर हाल मेँ अपना ही मफ़ाद
इस लिए करते हैँ पैमाने कयोटो से मफ़र
इस मुसीबत से नहीँ अहमद अली जाए फ़रार
भाग कर जाए तो अब जाए कहाँ नौए बशर
डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ज़ाकिर नगर, नई दिल्ली-110025

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